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हरियाणा पंचायत चुनाव का पूरा इतिहास : सबसे पहले पंच चुनते थे सरपंच, तीन साल था सरपंच का कार्यकाल, पढ़ें हरियाणा पंचायत चुनाव की पूरी कहानी

  • वर्ष 1952 में हुए पहले पंचायत चुनावों में था 3 साल का कार्यकाल, पंच चुनते थे सरपंच
  • हरियाणा पंचायती राज एक्ट लागू होने के बाद प्रदेश में 1994 में हुआ था पहला पंचायत चुनाव





विलेज ईरा। संदीप कम्बोज
हिसार/चंडीगढ़। हरियाणा में पंचायत चुनाव की रणभेरी अब किसी भी वक्त बजने वाली है। इस बार प्रदेश में 6वां पंचायत चुनाव होने जा रहा है। (haryana-panchayat-election-2021-history-of-haryana-panchayats-election-1952-to-2022) हरियाणा में इससे पहले वर्ष 2016 में 5वां पंचायत चुनाव हुआ था। अब सितंबर  2022 में हरियाणा में पंचायतों के 71 हजार 763 पदों पर चुनाव होने हैं। इनमें 6226 पद सरपंच, 62 हजार 40 पंच, 143 पंचायत समितियाें के 3086 सदस्य और 22 जिला परिषदों के 411 सदस्य शामिल हैं।  जिला परिषदों के  सदस्यों, ब्लाक समिति सदस्यों और सरपंचों के लिए चुनाव इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के जरिये होंगे, जबकि पंचों के लिए मतदान बैलेट पेपर के जरिये होगा। विलेज ईरा आपको बताने जा रहा है हरियाणा में पंचायत चुनाव का पूरा इतिहास। 1966 में जब से हरियाणा का गठन हुआ है तब से लेकर अब तक प्रदेश में पांच पंचायत चुनाव ही हुए हैं। 5 साल का सफर और अब 6वां पंचायत चुनाव?  लो पड़ गए ना आप भी सोच में। आज हम आपको हरियाणा पंचायत चुनाव की पूरी कहानी बताने जा रहे हैं। असल में 1994 से पहले प्रदेश में पंजाब ग्राम पंचायत एक्ट-1952 और पंजाब पंचायत समिति एक्ट-1961 लागू था। 1994 में इन दोनों एक्ट को मिलाकर हरियाणा पंचायती राज एक्ट-1994 लागू हुआ। उसके आधार पर पहला पंचायत चुनाव दिसंबर 1994 में हुआ था। तब से अब यह 6वां आम चुनाव है। जब पहला पंचायत चुनाव हुआ, उस वक्त 16 जिला परिषद, 110 पंचायत समिति और 5,958 पंचायतें थी। 60 से 80 के दशक में पंचायती राज व्यवस्था में सुधार के कई पड़ाव रहे। इस दौरान बलवंत राय मेहता कमेटी, एलएम सिंघवी, द सरकारिया कमीशन, वीएन गाडगिल कमेटी ने कई सुझाव दिए। तब जाकर 7 सितंबर 1990 को लोकसभा में 73वां संविधान संशोधन प्रस्ताव आया। लोकसभा भंग होने से मामला 2 साल अटका रहा। अगली लोकसभा में 22 दिसंबर 1992 को प्रस्ताव पास हुआ। 24 अप्रैल 1993 से संशोधन प्रभाव में आया। इससे ग्राम पंचायत संविधान का अंग बन गई। तब विभिन्न राज्यों में पंचायती राज सुधार लागू हुए। त्रि-स्तरीय ढांचा ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद का गठन हुआ। अनुसूचित जाति-जनजाति के साथ ही महिलाओं के लिए एक तिहाई पद आरक्षित हुए।

पहली पंचायत में था 3 साल कार्यकाल, पंच चुनते थे सरपंच
पंजाब ग्राम पंचायत एक्ट-1952 के तहत सबसे छोटी सरकार का कार्यकाल तीन साल था। पंच मिलकर सरपंच का चुनाव करते और अविश्वास प्रस्ताव लाकर पद से हटा सकते थे। पंचायत में एससी-एसटी वर्ग से एक पंच चुना जाना जरूरी था। महिलाओं के लिए कोटा नहीं था। आचार संहिता नहीं होती थी। प्रशासन 3-4 शिक्षकों की टीम बनाकर गांवों में चुनाव कराने के लिए भेजते थे। कोई वार्ड नहीं था। जिसे सबसे ज्यादा वोट मिलते, वही पंच बनते थे। रोचक बात यह होती थी कि कुछ गांवों में सभी पंच एक ही प्रभावशाली परिवार से चुनकर आ जाते थे।

1963 से सीधे चुना जाने लगा सरपंच, कार्यकाल हुआ 5 साल
1963 में पंजाब सरकार ने पंचायती राज एक्ट में संशोधन कर दिया। इसके तहत गांव का मतदाता सीधे सरपंच का चुनाव कर सकता था। पंचायत का कार्यकाल तीन साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया।

1966 में फिर पंच को वापस मिला सरपंच चुनने का अधिकार
1 नंबर 1966 में पंजाब से अलग हुए हरियाणा में 1971 में पंचायती राज एक्ट बदला गया। बंसीलाल सरकार ने सरपंच चुनने का अधिकार दोबारा पंचों को दे दिया। कार्यकाल पांच साल का रखा गया।

1978 में देवीलाल ने मतदाताओं को दिया सरपंच चुनने का अधिकार
1978 में चौ. देवीलाल की सरकार ने पंचायती राज एक्ट में संशोधन किया। पंचों से सरपंच बनाने का अधिकार छीनकर वापस मतदाता को दिया। पंचायत में एक महिला सीट की अनिवार्यता तय की गई।

चौथा बदलाव : भजनलाल सरकार ने कार्यकाल घटा दिया
1991 में एक बार फिर भजनलाल सरकार ने एक्ट में मामूली बदलाव किया। दोबारा से 5 साल के कार्यकाल को घटाकर 3 साल कर दिया गया। लेकिन वर्ष 1994 में इन हरियाणा पंचायती राज एक्ट-1994 लागू हो जाने के बाद फिर से सरपंचों का कार्यकाल 5 साल कर दिया गया।

2015 में पहली बार शिक्षित पंचायतों को कमान
वर्ष 2015 में मनोहर सरकार ने पंचायती राज व्यवस्था में में एक और बड़ा बदलाव करते हुए पंचायत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए शैक्षणिक योग्यता भी निर्धारित कर दी। हरियाणा में ये पहला पंचायत चुनाव था जब प्रदेश के गाँवों को पूर्णतया शिक्षित पंचायतें मिली।

इस बार 50 फीसद आधी आबादी की हिस्सेदारी
इस बार यानि वर्ष 2022 के पंचायत चुनाव में भाजपा-जजपा की गठबंधन सरकार ने पंचायत चुनाव में 50 फीसद पद महिलाओं के लिए आरक्षित करके आधी आबादी को भी बराबरी का हक दिया है।  इसके साथ ही अनुसूचित जाति के लिए भी पद निर्धारित किए हैं।

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