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हरियाणा के हर गाँव के काम की खबर : अपने गाँव को विकसित बनाना है तो पंचायत चुनाव से पहले खोज लिजिए इन 11 सवालों के जवाब


संदीप कम्बोज। विलेज ईरा 

हरियाणा में पंचायत चुनाव सिर पर हैं। ऐसे में गाँवों की सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार व पंचायतियों द्वारा करवाए गए विकास व सत्यानाश पर चर्चा करना बहुत जरुरी हो जाता है क्योंकि अगर इस वक्त गाँवों के इन गंभीर मसलों पर चर्चा नहीं की गई और ये आगामी पंचायत चुनाव में मुद्दा न बने तो ग्रामीण अगले पाँच साल फिर से नरक भोगने को विवश हो जाएंगे। विलेज ईरा ने हर गाँव के हर ग्रामीण के लिए 11 ऐसे सवाल तैयार किए हैं जिसका जवाब हर ग्रामीण वोटर को अपने विवेक से खोजना है, यदि वे अपने गाँव का ईमानदारी से विकास चाहते हैं तो। अभी आपके पास बहुत लंबा समय है। सितंबर में चुनाव होते हैं तो भी आपके पास 40-50 दिन का समय शेष है। आप इन सभी सवालों के जवाब तसल्ली से खोज सकते हैं। आप नीचे दिए इन सवालों  को इतमिनान से पढ़िए और अपनी आत्मा से इनके जवाब तलाशिए। आपसे एक गुजारिश है कि इन सवालों का जवाब खोजते वक्त अपना निजी हित एक तरफ रख रखना होगा तब कहीं जाकर आपकी आत्मा इन सवालों  का ईमानदार जवाब दे पाएगी और वो जो उत्तर होंंगे, वास्तव में वही आपके गाँव के विकास की ईबारत लिखेंगे। इन सवालों के जवाब खोजने में आप अपने घर-परिवार के बड़ों से मदद ले सकते हैं या फिर उस शख्स से जिसकी ईमानदारी पर आपको जरा सा भी संदेह न हो। तो पढें सवाल और पंचायत चुनाव से पहले कर लेें इनके जवाब की पड़ताल। यकिन मानिए यही जवाब ही आपको अच्छे व बुरे उम्मीदवार की पहचान करवाने में मददगार होंगे।

हर गाँव को बदलने का दम रखने वाले इन 11 सवालों के जवाब हर ग्रामीण वोटर को खोजना जरुरी है  

 1. क्या पूर्व पंचायतों के कार्यकाल में आपके गाँव के विकास कार्यों में कभी घोटाला हुआ है। और अब उन घोटालों या कथित घोटालों में शामिल सरपंच-पंचों, मेटों, इनके परिजनों,  सगे-संबंधियों,  चेले-चपाटों, चापलूसों को पंच, सरपंच,  पंचायत समिति सदस्य या जिला पार्षद सदस्य चुना जाना  चाहिए या नहीं ? 

2.  क्या आगामी पंचायत चुनाव में पूर्व सरपंच-पंचों, नंबरदारों इनके परिजनों,  सगे-संबंधियों,  चेले-चपाटों, चापलूसों को पंच, सरपंच,  पंचायत समिति सदस्य या जिला पार्षद सदस्य चुना जाना  चाहिए जिन्होंने पहले पंचायती/सरकारी फंड का दुरुपयोग कर अपने घरों, आंगन, पशुओं के बाड़े व खेतों आदि में इस्तेमाल किया है। 

3.  क्या आगामी पंचायत चुनाव में पूर्व सरपंच-पंचों, नंबरदारों इनके परिजनों,  सगे-संबंधियों,  चेले-चपाटों, चापलूसों को पंच, सरपंच,  पंचायत समिति सदस्य या जिला पार्षद सदस्य चुना जाना चाहिए जिन्होंने पंचायती सरकारी जमीनों व जोहड़ों पर अवैध कब्जे किए हुए हैं। 

4. क्या आगामी पंचायत चुनाव में अलग-अलग पार्टियों व नेताओं के वर्करों, करीबियों ,उनके परिजनों,  सगे-संबंधियों,  चेले-चपाटों, चापलूसों को पंच, सरपंच,  पंचायत समिति सदस्य या जिला पार्षद सदस्य चुना जाना  चाहिए जिन्होंने पहले नेताओं से नजदीकि का फायदा उठाकर अपने घर-परिवार,  रिश्तेदारों,  चेले-चापलूसों को सरकारी व ठेके की नौकरियां लगवाई हैं या सरकारी ठेके लिए हैं या कोई बड़ा अन्य निजी लाभ लिया है। 

5. क्या आगामी पंचायत चुनाव में अपने आप को अलग-अलग जातियों के ठेकेदार कहने वालों,  उनके परिजनों,  सगे-संबंधियों,  चेले-चपाटों, चापलूसों को पंच, सरपंच,  पंचायत समिति सदस्य या जिला पार्षद सदस्य चुना जाना  चाहिए जिन्होंने अपने समाज के लोगों के वोटों के दम पर अपनी राजनीतिक पहुंच बनाई,  नेताओं  से नजदीकी बढाई और अपने घर-परिवार,  रिश्तेदारों,  चेले-चापलूसों को  सरकरी नौकरियां व ठेके की नौकरियां लगवाई हैं या सरकारी ठेके लिए हैं या कोई बड़ा अन्य निजी लाभ लिया है। 

6. वो कौन पूर्व पंचायती हैं जो पिछले कई सालों से हर पंचायतों में मौके के पंच-सरपंचों से सांठ-गांठ कर पंचायती कामकाज में दखलंदाजी करते आ रहे हैं। क्या यही वे लोग तो नहीं हैं जो हर पंचायत को भ्रष्टाचार के तौर-तरीके सीखाकर गांव के हक का पैसा लुटवाते आ रहे हों। 

7. क्या नेताओं के दल्लों व जातियों के ठेकेदारों ने अपने नेताओं से गांव में कोई सांझा/सार्वजनिक काम भी करवाया है।  यदि गांव में कोई सांझा काम हुआ और उसे करवाने का श्रेय कौन दल्ला ले रहा है और उसमें उसका निजी हित क्या था।  

8. क्या नेताओं के दल्लों व जातियों के ठेकेदारों ने गांव का कोई सांझा/सार्वजनिक काम महज इसलिए रुकवा दिया क्योंकि उसमें उनका निजी स्वार्थ पूरा नहीं हो रहा था। क्या गांव में गांव के विकास हेतू सार्वजनिक/सांझे काम में रोडे़ अटकाने वाले नेताओं के दलाल व जातियों के ठेकेदार भी हैं। 

9. क्या गांव में अलग-अलग पार्टियों व नेताओं के दल्लों,उनके परिजनों में से भी कोई पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है  जिन्हें पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में शराब और पैसे बांटते देखा गया था। 

10. क्या गाँव में कोई ऐसे महानुभाव भी हैं पंचायत चुनाव को लेकर जिनके दिमाग में सिर्फ और सिर्फ जाति का कीड़ा घुसा है और वे अभी से गाँव में जाति का जहर घोलने में जुट गए हैं। क्या कुछ लोगों के दिमाग में एक ही कीड़ा घुसा है कि पंच-सरपंच, पंचायत समिति सदस्य सब उनकी ही जाति से चुने जाने चाहिए। ध्यान रहे जो लोग जातिगत जहर घोल रहे हैं, वे आपके गाँव के दुश्मन हैं। 

11. क्या आपके गाँव में कोई ऐसे लोग या उनकें परिजन, चापलूस भी पंचायत चुनाव में उतरने की तैयारी में हैं जो गाँव में किसी पंचायती/सार्वजनिक कमेटी, ट्रस्ट आदि की कमान संभाल रहे हैं। उनका व्यवहार कैसा है, क्या संबंधित कमेटी, ट्रस्ट में अहम पदों पर रहते हुए उन्होंने पैसों का कोई घोटाला तो नहीं किया है या फिर फर्जीवाड़ा करके कमेटी, ट्रस्ट की जमीन या अन्य संसाधन आदि हड़प लिए हों। 

विलेज ईरा निवेदन : अपने गांव का विकास चाहते हैं तो इस बार पंचायत चुनाव से पहले इस प्रकार के सभी लोगों को एक-एक कर अच्छी तरह पहचान लें जो पहले भी आपके गाँव को लूटते आ रहे हैं। और ईमानदारी का दिखावटी तगमा लगाकर आगे भी पंच, सरपंच,  पंचायत समिति सदस्य, जिला पार्षद बनकर आपके गाँव को लूटने के लिए तैयार बैठे हैं। सभी पाठकों से निवेदन कि विलेज ईरा द्वारा तैयार इन सवालों को ज्यादा से ज्यादा वायल व शेयर करके हर गाँव के हर ग्रामीण तक पहुुंचाने का प्रयास करें ताकि आने वाले पंचायत चुनाव में हरियाणा के किसी भी गाँव में एक भी आदमी गलत न चुना जाए। क्योंकि कहा भी गया है एक सड़ी हुई मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है। इसलिए समय से पहले ऐसी सड़ी हुई मछलियों की पहचान आप भी करें और गाँव के बच्चे-बच्चे को करवाएं। 



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